अपने पथ पर चलते चलो
दुखों को सारे झेलते चलो
तुम कोई कमजोर नहीं , उस ईश्वर का अंश हो
समेट अपने ग़मों को, खुशियों के सागर में गोते लगाते चलो
आँधी हो या तूफ़ान सब से लड़ते चलो
किसी के भावनाओं से तुम न खेलते चलो
अकेलें आएँ थे अकेलें जाना हैं
गमो पर अपने लगा ठहाके खुशियाँ सबमें बाँटते चलो
क्या लेकर आए थे क्या लेकर जाओगे बंदे
जो कुछ हैं सब यही

