ये बारिश की बुँदे हैं , या कोई मयखाना , गिरी जो तन पे , बहका मैं बहकी वो , महकी तन की खुशबु , फूल भी महका , बगिया भी महकी , जब गिरी बारिश की बुँदे , महकी सारी फिजायें , इस भीगे मौसम में , बहकी सारी जवानी !
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