Monday, 28 July 2025

अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं

 जब मन भर जाए तो बहाने बना देते हैं 


अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं 


इतना तो जुर्म भी नहीं होता अपना 

जितना के लोग अफ़साने बना देते हैं 


बिन मतलब के मूसीवत में जिनके लिए काम आए 

वही अपने मुसबीत में अंजाने बना देते हैं 


सच्चे दिल से जिन्हें खुदा मानकर प्यार किया 

अब के जमाने में वही हमे बेगाने बना देते हैं


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