Sunday, 26 October 2025

गमो पर अपने लगा ठहाके


 अपने पथ पर चलते चलो 

दुखों को सारे झेलते चलो 


तुम कोई कमजोर नहीं , उस ईश्वर का अंश हो 

समेट अपने ग़मों को, खुशियों के सागर में गोते लगाते चलो 


आँधी हो या तूफ़ान सब से लड़ते चलो  

किसी के भावनाओं से तुम न खेलते चलो  


अकेलें आएँ थे अकेलें जाना हैं  

गमो पर अपने लगा ठहाके खुशियाँ सबमें बाँटते चलो 


क्या लेकर आए थे क्या लेकर जाओगे बंदे 

जो कुछ हैं सब यही 



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