Saturday, 16 April 2022

ग़म के सागर में डूब कर तु क्या पाएगा !


 ग़म के सागर में डूब कर तु क्या पाएगा !

ऐसे ही रहा तो एक दिन खुद के आंसुओं में डूब जाएगा !!


तैरना भी तो आता नहीं तुझे दुनिया के सागर में !

भटक गया जो इस सागर में , तो कैसे इसपार आएगा !!


मत कर भरोसा इन चंद पल के रिश्तों पर !

वरना देखना एक दिन तु इनसे ही धोखा खाएगा !! 


किसी एक के लिए अपनो को छोड़ने वालों !

अगर अपने ही खो गए , तो कहाँ से उनको ढूँढ के लाएगा !! 

Wednesday, 13 April 2022

कभी कभी सोचता हुँ••••••••

 कभी कभी सोचता हुँ••••••••

इन बेबस बेसहारों को कौन सुलाता होगा 

कौन इस नन्ही सी जान को दुलारता होगा 

भूख लगने पर किसको ये पुकारता होगा 

किसको कहता होगा अपने दर्द सारे 



कभी कभी सोचता हुँ••••••••

दर बदर भटक कर रोटियाँ कम ,

गलिया ही ज़्यादा खाता होगा ! 

अपने आँसू से ही ,

अपनी भूख और प्यास मिटाता होगा  !! 


कभी कभी सोचता हुँ••••••••

खिलौनो से खेलने की उम्र में 

आँसुओ से खेलने की इनकी उम्र तो नहीं 

इतनी सी उम्र में ,

इतनी जिम्मेदारियाँ उठाने की इनकी उम्र तो नहीं 


कभी कभी सोचता हुँ••••••••

कैसे दया नहीं आती किसी को इनपर 

क्यों कोई इनको नहीं अपनाता 

क्यों इनको मरने के लिए छोड़ देते हैं 

अपने चन्द ख़ुशियों के लिए 


कभी कभी सोचता हुँ••••••••

क्या ख़ुदा सच मुच हैं धरती पर 

अगर हैं तो क्यों बेसहारा हैं कोई

क्यों इनको भटकता हुवा छोड़ गया कोई 

क्यों इनकी आँखे नम रहती हैं 


Friday, 1 April 2022

छोड़ आए वो मोहब्बत की गलिया. वो मुस्कान वो कलियाँ ! अब कोई न दिखाएँ हमें रास्ता , अब भा गई हमें अंधेर गलिया !!


छोड़ आए वो मोहब्बत की गलिया.

वो मुस्कान वो कलियाँ !

अब कोई न दिखाएँ हमें रास्ता ,

अब भा गई हमें अंधेर गलिया !!