Sunday, 26 October 2025

गमो पर अपने लगा ठहाके


 अपने पथ पर चलते चलो 

दुखों को सारे झेलते चलो 


तुम कोई कमजोर नहीं , उस ईश्वर का अंश हो 

समेट अपने ग़मों को, खुशियों के सागर में गोते लगाते चलो 


आँधी हो या तूफ़ान सब से लड़ते चलो  

किसी के भावनाओं से तुम न खेलते चलो  


अकेलें आएँ थे अकेलें जाना हैं  

गमो पर अपने लगा ठहाके खुशियाँ सबमें बाँटते चलो 


क्या लेकर आए थे क्या लेकर जाओगे बंदे 

जो कुछ हैं सब यही 



खुशियों के गीत गाते चलो





कोई साथ दे या ना दे , खुशियों के गीत गाते चलो !
दुखों को ढालकर कविता में लोगो को सुनाते चलो !!

कोई निभाए या ना निभाए तुम रिश्ते निभाते चलो !
उनको बना संगीत ग़ज़ल में ढालते चलो !!

चार पल की जिंदगी किसी से कैसा बैर !
सब को माफ़ करो, सब कुछ भुलाते चलो !!

उसने ये किया - उसने वो किया छोड़ो यार !
तुम अपने कर्म से सब को लुभाते चलो !!

Saturday, 25 October 2025

तेरा यौवन बनकर शराब


 तुझे कागज़ पर मैं लिखता रहा

कागज़ पढ़ पढ़ शरमाता रहा  


छू रहे थे मेरे कलम तेरे बदन को 

मैं सितारों के बीच , चाँद तुझको कहता रहा 


मैं बहकता रहा सम्भलता रहा  

तेरे आग से बदन को मैं फिर भी  शीतल कहता रहा  


मेरे क़लम से कागज पर अंग अंग तेरा नीखरता रहा 

तेरा यौवन बनकर शराब मेरे कलम से कागज़ पर छलकता रहा 


जल्दी थी नहीं आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता रहा मंजिल की ओर 

और तूझे ही नशा शराब ख़ाब उन्माद गजलों में कहता रहा 


Sunday, 12 October 2025

रिश्तों का पकवान


 रिश्तों का बन रहा पकवान हैं 


तुम जिसे दिल में बसाकर पूज रहे 

क्या वो सच मुच भगवान हैं


Monday, 25 August 2025

ढूँढते हैं

ग़म को छोड़ किसी किनारे में

कोई खुशियों का नया किनारा ढूँढते हैं

तुम जो दो साथ मेरा

हर दुख का किनारा ढूँढते हैं

ख़ुशिया हैं पास ही

और हम कहाँ सहारा ढूँढते हैं

चल दोनों साथ मिलकर

ख़ुशियों का आशियाना ढूँढते हैं

जहाँ किसी से किसी का न बैर हो

चल कोई ऐसा जमाना ढूँढते हैं

आँसुओं को बनाकर ढाल

चल कोई नया तराना ढूँढते हैं

Monday, 28 July 2025

यादें तेरी वातें तेरी तेरा ही नूर हैं


 यादें तेरी वातें तेरी तेरा ही नूर हैं 

तुझसे ही हैं प्रीत सनम , तू कितना भी दूर हैं 

तेरी ही तस्वीर निहारू, चुपके चुपके नीर बहाऊँ 

समझ न पाये प्रीत मेरी , सनम तु कितना मगरूर हैं 

न जाने किस ग़लत फ़हमी में तू चूर हैं 

और तुम कहते हो हम फालतू हुज़ूर हैं 

सच्चा प्यार सच्ची प्रीत तुम्हें समझ न आई 

मुझमें ही लगता कोई कमी जरूर हैं 

अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं

 जब मन भर जाए तो बहाने बना देते हैं 


अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं 


इतना तो जुर्म भी नहीं होता अपना 

जितना के लोग अफ़साने बना देते हैं 


बिन मतलब के मूसीवत में जिनके लिए काम आए 

वही अपने मुसबीत में अंजाने बना देते हैं 


सच्चे दिल से जिन्हें खुदा मानकर प्यार किया 

अब के जमाने में वही हमे बेगाने बना देते हैं


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Monday, 12 May 2025

तलाश में हूँ

कोइ खों कर मिल गाया , कोई मिलकर खो गया

मैं फिर भी न जाने कयों उन्ही के तलाश में हूँ

हूं इन्सान मैं भी दर्द होता हैं मुझें भी

मैं पागल फिर भी एक नए दर्द की तलाश में हूँ

जनता हूं यहाँ कोई नहीं अपना सब मत्लब के यार हैं

मैं फिर भी मतलब के यार के तलाश में हूँ

जा निकल गई मैं फिर भी उनके इंतज़ार में हूँ

मैं पागल हूँ एक पागल की तलाश में हूँ

Copyright:- Omkar S. Shinde