Monday, 28 July 2025

यादें तेरी वातें तेरी तेरा ही नूर हैं


 यादें तेरी वातें तेरी तेरा ही नूर हैं 

तुझसे ही हैं प्रीत सनम , तू कितना भी दूर हैं 

तेरी ही तस्वीर निहारू, चुपके चुपके नीर बहाऊँ 

समझ न पाये प्रीत मेरी , सनम तु कितना मगरूर हैं 

न जाने किस ग़लत फ़हमी में तू चूर हैं 

और तुम कहते हो हम फालतू हुज़ूर हैं 

सच्चा प्यार सच्ची प्रीत तुम्हें समझ न आई 

मुझमें ही लगता कोई कमी जरूर हैं 

अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं

 जब मन भर जाए तो बहाने बना देते हैं 


अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं 


इतना तो जुर्म भी नहीं होता अपना 

जितना के लोग अफ़साने बना देते हैं 


बिन मतलब के मूसीवत में जिनके लिए काम आए 

वही अपने मुसबीत में अंजाने बना देते हैं 


सच्चे दिल से जिन्हें खुदा मानकर प्यार किया 

अब के जमाने में वही हमे बेगाने बना देते हैं


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