
यादें तेरी वातें तेरी तेरा ही नूर हैं
तुझसे ही हैं प्रीत सनम , तू कितना भी दूर हैं
तेरी ही तस्वीर निहारू, चुपके चुपके नीर बहाऊँ
समझ न पाये प्रीत मेरी , सनम तु कितना मगरूर हैं
न जाने किस ग़लत फ़हमी में तू चूर हैं
और तुम कहते हो हम फालतू हुज़ूर हैं
सच्चा प्यार सच्ची प्रीत तुम्हें समझ न आई
मुझमें ही लगता कोई कमी जरूर हैं
