कोइ खों कर मिल गाया , कोई मिलकर खो गया
मैं फिर भी न जाने कयों उन्ही के तलाश में हूँ
हूं इन्सान मैं भी दर्द होता हैं मुझें भी
मैं पागल फिर भी एक नए दर्द की तलाश में हूँ
जनता हूं यहाँ कोई नहीं अपना सब मत्लब के यार हैं
मैं फिर भी मतलब के यार के तलाश में हूँ
जा निकल गई मैं फिर भी उनके इंतज़ार में हूँ
मैं पागल हूँ एक पागल की तलाश में हूँ
Copyright:- Omkar S. Shinde