Monday, 25 August 2025

ढूँढते हैं

ग़म को छोड़ किसी किनारे में

कोई खुशियों का नया किनारा ढूँढते हैं

तुम जो दो साथ मेरा

हर दुख का किनारा ढूँढते हैं

ख़ुशिया हैं पास ही

और हम कहाँ सहारा ढूँढते हैं

चल दोनों साथ मिलकर

ख़ुशियों का आशियाना ढूँढते हैं

जहाँ किसी से किसी का न बैर हो

चल कोई ऐसा जमाना ढूँढते हैं

आँसुओं को बनाकर ढाल

चल कोई नया तराना ढूँढते हैं