Tuesday, 31 May 2016

शब्द ख्वाहिशों के ढूँढता हूँ अन्जान सी तस्वीरों में

शब्द ख्वाहिशों के ढूँढता हूँ
अन्जान सी तस्वीरों में
कोई अपना सा ढूँढता हूँ
अंजान सी राहों में
कल तसव्वुर में देखा था जिसे
आज उसे हकीकत में ढूँढता हूँ

Thursday, 26 May 2016

किसी ने बात करना छोड़ दिया , किसी ने कॉमेंट करना छोड़ दिया !

किसी ने बात करना छोड़ दिया ,
किसी ने कॉमेंट करना छोड़ दिया !
बढ़ गया हैं ग़म इतना ,
इस शरीर ने साथ देना छोड़ दिया !

हम तो करते गए लाइक कॉमेंट ,
सब ने हमें इग्नोर किया !
देखते ही देखते न जाने क्यूँ ,
सब ने हमें अनफ़्रेंड किया !

न कोई हममें अश्लीलता हैं ,
न हमने किसी को कभी दर्द दिया !
फिर भी न जाने क्यूँ यारों ,
सब ने हमें दग़ा दिया !


Monday, 23 May 2016

वो बचपन याद आत है वो शरारत याद आती हैं

वो बचपन याद आत है
वो शरारत याद आती हैं
वो रुठना वो मनाना
बचपन की हर वो बात याद आती हैं 
न दुनिया दारी थी
न दिल में भेद भाव था
जो भी था वो 
एक सच्चा प्यार था
वो बातों बातों में दोस्तों से झड़ना
झगड़कर फिर एक हो जाना
यू एठ कर वो चल देना
याद आता हैं मुझे अब भी वो गुज़रा ज़माना

Saturday, 21 May 2016

तुम सर्द की ठंड मौसम मैं गर्मि की तपती धूप

तुम सर्द की ठंड मौसम
मैं गर्मि की तपती धूप 
तुम हरियाली मौसम की 
मैं पतझड़ का मौसम
तुम ख़ुशियाँ फुहारों की 
मैं साथी दुखियारो की 
तुम घटा सावन की 
मैं ख़ाक गलियारो की
तुम बहेती नदी 
मैं ठहेरा पानी
तुम साधना प्रेम की
मैं निशानी पाप की
मैं बोझ इस धरती का
मेरा तेरा कोई मेल नहीं

Saturday, 14 May 2016

कुछ फ़ेक आइड़ी वाले सबको फ़ेक समझते हैं ,

कुछ फ़ेक आइड़ी वाले सबको फ़ेक समझते हैं ,
शायद अपनी तरह हमको भी समझते हैं !
ख़ुद जिनकी कोई असली पहचान नहीं ,
वो सारी दुनिया को आज फ़ेक समझते हैं !

Friday, 13 May 2016

thought

अपने मुँह कभी ख़ुद की तारीफ़ नहीं किया करते ,
क़िस्में कितना हैं हुनर ये ज़माना हमसे अच्छा जानता हैं !

Tuesday, 3 May 2016

मुझको लूटा सब ने जिसकी जितनी थी औक़ात , मैं खड़ा तमाशा देखते और वो मंद मंद मुसकाय !

मुझको लूटा सब ने जिसकी जितनी थी औक़ात ,
मैं खड़ा तमाशा देखते और वो मंद मंद मुसकाय !

एक मुद्दत हूवा तुमसे किए हुवे बात ,
ये आँखे अब भी करती हैं बस तेरा इंतज़ार !

सपने मुझे दिखाकर फिर कहीं छुप जाए ,
सावन आया भादव आया पर वो नहीं आए !

ये मनुवा बड़ा पागल खड़ा उन्ही के राह ,
वो बावरी ऐसी गई मिला न कोई उसका थाह !

ढूँढु मैं तुझको कहा कहा कुछ मुझे समझ न आए ,
मैं हूवा तेरी याद में बावरा मुझे कोई राह नज़र न आए !

मेरे इस प्यार की अभी नहीं कोई तुझे थाह ,
जब कोई तेरा दिल तोड़े तब तुझे समझ में आए !

Sunday, 1 May 2016

तेरी हर अकड़ ने हमें लड़ना सिखाया हैं , तेरे गलियों ने हमें सच्चा राह दिखाया हैं ! हम तो तुझे समझते हैं अमृत की रसधारा , बस तूने ही अपने आपको जहेर बनाया हैं !

तेरी हर अकड़ ने हमें लड़ना सिखाया हैं ,
तेरे गलियों ने हमें सच्चा राह दिखाया हैं !
हम तो तुझे समझते हैं अमृत की रसधारा ,
बस तूने ही अपने आपको जहेर बनाया हैं !

मुझे अक्सर तेरे चेहरे के पीछे ,
एक अच्छा इंसान नज़र आया है !
हम तुझे समझते हैं दोस्त ,
बस तूने ही अपने आपको दुश्मन बनाया हैं !

हर राहों में तेरे हम बिखरते हैं बन कर फूल ,
तेरे होंठों पर लाली बनकर खिलते हैं !
हम तो तुझे समझते हैं फूल ,
बस तूने ही अपने आप को काँटा बनाया हैं !

बेशक तुम हमसे ना करो शिकायत ,
या चाहे तुम ना करो बात !
हमें तो तुमसे करते प्यार ,
बस तूने ही अपने आप को नफ़रतों में फँसाया हैं !