ग़म को छोड़ किसी किनारे में
कोई खुशियों का नया किनारा ढूँढते हैं
तुम जो दो साथ मेरा
हर दुख का किनारा ढूँढते हैं
ख़ुशिया हैं पास ही
और हम कहाँ सहारा ढूँढते हैं
चल दोनों साथ मिलकर
ख़ुशियों का आशियाना ढूँढते हैं
जहाँ किसी से किसी का न बैर हो
चल कोई ऐसा जमाना ढूँढते हैं
आँसुओं को बनाकर ढाल
चल कोई नया तराना ढूँढते हैं 
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