Monday, 28 July 2025

यादें तेरी वातें तेरी तेरा ही नूर हैं


 यादें तेरी वातें तेरी तेरा ही नूर हैं 

तुझसे ही हैं प्रीत सनम , तू कितना भी दूर हैं 

तेरी ही तस्वीर निहारू, चुपके चुपके नीर बहाऊँ 

समझ न पाये प्रीत मेरी , सनम तु कितना मगरूर हैं 

न जाने किस ग़लत फ़हमी में तू चूर हैं 

और तुम कहते हो हम फालतू हुज़ूर हैं 

सच्चा प्यार सच्ची प्रीत तुम्हें समझ न आई 

मुझमें ही लगता कोई कमी जरूर हैं 

अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं

 जब मन भर जाए तो बहाने बना देते हैं 


अब इश्क़ में कितने फ़साने बना देते हैं 


इतना तो जुर्म भी नहीं होता अपना 

जितना के लोग अफ़साने बना देते हैं 


बिन मतलब के मूसीवत में जिनके लिए काम आए 

वही अपने मुसबीत में अंजाने बना देते हैं 


सच्चे दिल से जिन्हें खुदा मानकर प्यार किया 

अब के जमाने में वही हमे बेगाने बना देते हैं


@highlight

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Monday, 12 May 2025

तलाश में हूँ

कोइ खों कर मिल गाया , कोई मिलकर खो गया

मैं फिर भी न जाने कयों उन्ही के तलाश में हूँ

हूं इन्सान मैं भी दर्द होता हैं मुझें भी

मैं पागल फिर भी एक नए दर्द की तलाश में हूँ

जनता हूं यहाँ कोई नहीं अपना सब मत्लब के यार हैं

मैं फिर भी मतलब के यार के तलाश में हूँ

जा निकल गई मैं फिर भी उनके इंतज़ार में हूँ

मैं पागल हूँ एक पागल की तलाश में हूँ

Copyright:- Omkar S. Shinde

Friday, 22 November 2024

ख़यालों ही ख़यालों में एक ख़याल आया

 ख़यालों ही ख़यालों में एक ख़याल आया


क्या तुम्हें कभी मेरा ख़याल आया…?


कितने टुकड़ों में टूटकर बिखरे हैं 


क्या कभी ये ख़याल आया…?


कैसे कटता होगा दिन कैसे कटती होगी रात


क्या कभी


ये ख़याल आया…?


दर्द और आँसुओ में कितने पन्ने बह गए 


क्या कभी ये ख़याल आया…?


कभी तो तेरा भी मुझसा हाल होगा


क्या कभी ये ख़याल आया…? 


Writer:- Presha Virani


#everyonehighlightsfollowers

#ख़यालों ही ख़यालों में एक ख़याल आया


क्या तुम्हें कभी मेरा ख़याल आया…?


कितने टुकड़ों में टूटकर बिखरे हैं 


क्या कभी ये ख़याल आया…?


कैसे कटता होगा दिन कैसे कटती होगी रात


क्या कभी ये ख़याल आया…?


दर्द और आँसुओ में कितने पन्ने बह गए 


क्या कभी ये ख़याल आया…?


कभी तो तेरा भी मुझसा हाल होगा


क्या कभी ये ख़याल आया…? 



Sunday, 27 October 2024

 दिल में लिए यादों का समंदर 

होठों पर उनके तराने लिए तू बस गीत नए कुछ छोड़ 


प्यार वफ़ा वादे खो गए हैं कही , तू चल उनको खोज 

राहे हैं बड़ी बेवफ़ा उनकी , ओमकार तू ख़ुद को उस और न मोड़ 


लूटा दे ज़िंदगी अब उनपर जो तेरे हैं , दूसरो की अब तू चिंता छोड़ 

लिख कोई अब नए धड़कते तराने , ये चुप्पी अब तोड़ 


देख यहाँ जो तेरे अपने हैं , वो बुला रहे कर कर के शोर 

मिला ले आँसुओ से आंसू दोस्तों के , फिर कोई नग़मे नए तू जोड़ 


#स्वयं_रचित_ओमकार 

#Copyright_Omkar

@highlight


Monday, 1 August 2022

एक नई ड़ोर हुँ मैं

 जो करते हैं पसंद उन्हें सलाम 

नो नहीं करते उन्हें भी सलाम 
दुश्मनों को भी गले लगाते 
यहाँ नफ़रतों का क्या काम 
हमने तो मह्फ़िल में 
खुलकर दिल तोल दिए 
करते है जो अनदेखा 
उनसे भी हँसकर बोल दिए 
ऐसा नहीं के क़मज़ोर हुँ मैं 
एक नया भोर हुँ मैं 
इंसानियत की 

एक नई ड़ोर हुँ मैं 

Friday, 3 June 2022

मानो गे यहाँ किसको तुम ख़ुदा ! यहाँ एक नहीं , सब के कई यार हैं !!

 यहाँ प्यार नहीं , धोखों का बाज़ार हैं !

इश्क़ के नाम पर , होता बस व्यापार हैं !! 


विपक्ष में बैठे रहते हैं उनके दिल में कई और भी !

यहाँ बदलती रहती रोज़ उनकी सरकार हैं !! 



मानो गे यहाँ किसको तुम ख़ुदा !

यहाँ एक नहीं , सब के कई यार हैं !! 


पता ही नहीं चल पता कभी !

धोखे में हम हैं , या धोखे से प्यार हैं !! 


करो जिसपर यहाँ भरोसा ,

उसी के हाथों होता , यहाँ दिल तार तार हैं !!