Wednesday, 4 November 2015

दुनियाँ से अलग अपनी कहानियाँ हैं

दुनियाँ से अलग अपनी कहानियाँ हैं ,
हर राह में बस तेरी मेरी नादानियाँ हैं !

जो अपने मिला करते थे रातों के साये में हमको ,
कहाँ दिन में उनकी दिखती परछाइयाँ हैं !

तू कहाँ कहाँ ये हसीन वादियाँ हैं ,
क्या करे हम सनम कहाँ तेरी निशानियाँ हैं !

बिन तेरे मुझे चैन मिलता नहीं ,
कहाँ तेरी वो रवनिया हैं !

कहा जाऊँ कहा नहीं कहा तेरी परछाइयाँ हैं ,
हर तरफ़ बिछी हुई मेरी बर्बादिया हैं !

कोई भी कसर तूने छोड़ा नहीं ज़िंदगी ,
कहाँ वो मेरी अब निशानियाँ हैं !

माँ

होंठों पर नाम दिल में सदा ,

आदर रहता हैं !

हर वक़्त मेरा सर ,

उन्ही के पैरों पर नतमस्तक रहता हैं !

माँ कहो या कहो देवी माँ उन्हें ,

हर लफ़्ज़ उन्ही का शोभा होता हैं !

हर पहर मेरा अब तो ,

माँ बाप की सेवा में होता हैं !

उन्ही के प्यार में हम गिरफ़्तार हैं ,

उन्ही की गोद में सारा संसार हैं !

इस दुनिया में बस एक यहीं ,

माँ के नाम का सच्चा दरबार हैं !

Thursday, 29 October 2015

आज ही एक ट्वीट पर , किसी से मुलाकात हो गई ! न होनी थी जो बात , आज वही बात हो गई !

आज ही एक ट्वीट पर ,
किसी से मुलाकात हो गई !
न होनी थी जो बात ,
आज वही बात हो गई !

न सावन आया न बादल गरजे ,
फिर कैसे ये बात हो गई !
आज किसी से ट्वीट पर ,
प्यार की बात हो गई !

जाना सुना था मगर देखा न था ,
देखते ही देखते ये बात हो गई !
आज ट्वीटर पर अपनी भी ,
किसी हसनी से मुलाक़ात हो गई !

कुछ बात ऐसी चली ,
के बाते उनसे दिन रात हो गई !
बातों ही बातों में आज ,
वो दिल के करीब आ गई !

अब तक था जिससे अंजान मैं ,
आज वही हमराज़ हो गई !
अब तक था बे पनाह मैं ,
आज किसी के दिल में पनाह हो गई !

न मैंने दिल की बात कही ,
फिर कैसे उसने दिल की बात सुनली !
अंजान सफ़र अंजान डगर में ,
आज किसी से दिल की बात हो गई !

आज ट्वीटर पर अपनी भी , किसी हसीन से मुलाकात हो गई !

आज किसी से दिल की बात हो गई ,
लगता हैं जैसे प्यार की बरसात हो गई !
न सावन आया न बादल गरजे ,
फिर कैसे ये बात हो गई !

जाना सुना था मगर देखा न था ,
देखते ही देखते ये बात हो गई !
आज ट्वीटर पर अपनी भी ,
किसी हसनी से मुलाक़ात हो गई !

कुछ बात ऐसी चली ,
के बाते उनसे दिन रात हो गई !
बातों ही बातों में आज ,
वो अपने करीब आ गई !

अब तक था जिससे अंजान मैं ,
आज वही हमराज़ हो गई !
अब तक था बे पनाह मैं ,
आज किसी के दिल में पनाह हो गई !

न मैंने दिल की बात कही ,
फिर कैसे उसने दिल की बात सुनली !
अंजान सफ़र अंजान डगर में ,
आज किसी से दिल की बात हो गई !

Tuesday, 27 October 2015

माँ बहेन और इज्जत

  आज लूटी जो इज़्ज़त बहेनों कीं ,

  तो कल राखी क़िस्से बँधाओ गे !

   माँ कि ममता वो माँ की गोद ,

   कल फिर तुम कहाँ पाओगे !

      समय की इस धार में ,

  तुम फँसते ही चले जाओगे !

  आज खोया बहूँ बेटी तुमने ,

कल माँ को भी न ढूँढ पाओगे !

     हैवानियत का खेल यें ,

    कब तक खेल पाओगे !

    नहीं रहेंगी माँ बेटी तो ,

फिर जन्म कहा से पाओगे !

  इसीलिए कहेता हूँ भाई ,

    अब भी रुक जाओं !

   इस मिटती दुनियाँ को ,

     तुम आज बचाओ !

प्यार और रूसवाइयां

हसरत भरी निगाह से ,
हमें यूँ ना देखा करों !
ज़माना जान जाएगा ,
यूँ इशारे ना किया करों !

यूँ पास बुलाकर ,
क़लई न मरोड़ा करों !
रूसवाइयों का डर हैं ,
यूँ बाँहों में ना लिया करों !

अभी तो बाली उमर हैं मेरी ,
यूँ हमसे ना खेला करों !
प्यार के इस फूल को ,
अभी बगिया में ही महेकने दो !

समाज के ठेकेदार

समाज के ठेकेदारों ने ,
क्या ख़ूब रंग दिखलाया है !
ग़रीबों को लूटकर ,
ख़ुद का जेब भरवाया है !

वहा एक निवाला खाने को नहीं ,
पल पल मर रहा इंसान हैं !
यहाँ भरी पड़ी तिजोरी गोदाम सारे ,
पर देने की नियत नहीं हैं !

बेशर्मियत का ये नंघा नाच ,
सरे आम खेला जाता हैं !
अपना रक्षक ही आज ,
भक्षक बनकर बैठा हैं !

देते हैं एक हाथ से ,
लेते हैं ये दो हाथ से !
बच के रहना भाई ,
समाज के ठेकेदार से !