कोई साथ दे या ना दे , खुशियों के गीत गाते चलो !
दुखों को ढालकर कविता में लोगो को सुनाते चलो !!
कोई निभाए या ना निभाए तुम रिश्ते निभाते चलो !
उनको बना संगीत ग़ज़ल में ढालते चलो !!
चार पल की जिंदगी किसी से कैसा बैर !
सब को माफ़ करो, सब कुछ भुलाते चलो !!
उसने ये किया - उसने वो किया छोड़ो यार !
तुम अपने कर्म से सब को लुभाते चलो !!

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