Saturday, 30 January 2016

मेरे क़लम की जान हों तुम

किसी का प्यार हों तुम ,
किसी का भोर हों तुम !
पर जबसे क़दम पड़े तेरे मेरे जीवन ,
तबसे मेरे क़लम की जान हों तुम !

Friday, 29 January 2016

नारी व अत्याचार

हर राह हर गली में नारी पर ज़ुल्म होता हैं ,
जहाँ देखो वहीं बस अत्याचार होता हैं !
मारी सिटी खिंचा दुपट्टा ,
फिर इज़्ज़त उनका तार तार होता हैं !

क्यों नहीं समझते हुस्न जब बे पर्दा होता हैं ,
तभी आग लगने का डर होता हैं !
मत छेड़ो राह चलते उनको ,
इन्ही में माँ काली का रूप बसता हैं !

बन गई ये काली माँ तो ,
फिर अंतिम छःण तेरा दूर नहीं !
सोच विचार ले तु अब भी ,
ये कोई अबला नारी नहीं !

Thursday, 28 January 2016

सच्चा प्यार कभी बर्बाद नहीं होता

सच्चा प्यार कभी बर्बाद नहीं होता ,
हर आशिक़ कभी बेवफ़ा नहीं होता !
चाँद गगन चाहे धरती से तुम पूँछ लो ,
जलते हीं चराग महफ़िल में फिर अँधेरा नहीं होता !

Wednesday, 27 January 2016

मैं और तेरी परछाईं हैं

मैं मेरी क़लम और तेरी परछाईं हैं ,
तु नहीं तो सनम तरी याद हीं चली आइ हैं !
तु मुझसे दूर मैं तुझसे दूर ,
और कोई नहीं साथ मैं और तेरी परछाईं हैं 

ये ग़ज़ल ये शाम और तु याद आइ हैं ,
हर लफ़्ज़ हैं रूठे रूठे हर तरफ़ तन्हाई हैं !
तु नहीं तो मैं नहीं मैं नहीं तो तु नहीं ,
दूर तक हैं ख़ामोशी मैं और तेरी परछाईं हैं !

हर राह हैं सुना सुना हर जगह अँधियारा हैं ,
रोशनी चुभती हैं शूल सा अँधियारा बड़ा हीं प्यार हैं ,
बिन तेरे उजड़ा मेरा संसार ,
कोई न अब साथी मैं और तेरी परछाईं हैं !

हर दिन हैं बुझा बुझा हर हर रात सिर्फ़ तन्हाई हैं ,
सावन भी भाता नहीं हर मौसम हरजाई हैं !
बिन तेरे मैं भी न जी पाउँगा ,
इस जहाँ में बस मैं और तेरी परछाईं हैं !


Tuesday, 26 January 2016

नील गगन में लहराए तिरंगा

भारत की धड़कन तिरंगा ,
शहीदों की याद तिरंगा !
हम सब को देश भक्ति सिखलाती ,
नील गगन में लहराए तिरंगा !

अपने इतिहास का गवाह तिरंगा ,
उन महान शूर वीरों की गाथा तिरंगा !
सभी की प्रेम भावना सिखाता ,
नील गगन में लहराता तिरंगा !

रग रग में दौड़ता तिरंगा ,
हर बच्चे की मुस्कान तिरंगा !
दुश्मन भी शीश झुका दे ,
यूँ नील गगन में लहराए तिरंगा !

भारत की शान तिरंगा ,
भारत की जान तिरंगा !
फक्र से सर ऊँचा कर्दे ,
यूँ नील गगन में लहराए तिरंगा !

Monday, 25 January 2016

आज भारत के लाल हीं अपनी माँ को बेचते हैं

देते हैं पैसे का लालच ,
फिर वतन लुटवाते हैं !
आज कुछ अपने ही भाई बंधू  ,
कांवड़ियों के दाम बिकते हैं !

पीते हैं जिस माँ का दूध ये ,
उसिका ये स्तन नोचते हैं !
हर नुक्कड़ हर गली में ,
खड़े हुवे ये कुत्ते मिलते हैं !

लूट कर अपनी हीं माँ को ,
दुश्मन के तलवे चाटते हैं !
जो किसी का हो ही न सका ,
उसी पैसे के पीछे ये भागते हैं !

चंद पैसों के ख़ातिर ये ,
सारा खेल रचते हैं !
जिस थाली में खाते हैं ,
उसी में ये छेद करते हैं !

इंसा के रूप में ये ,
भेड़िए का दिल रखते हैं !
आज भारत के लाल हीं ,
अपनी माँ को बेचते हैं !

किसी का प्यार किसी का दुलार छोड़ आया

किसी का प्यार किसी का दुलार छोड़ आया ,
अपने आँगन की वो छांव छोड़ आया ! 
मैं अपने भारत माँ को बचाने ,
मैं अपने बच्चे को घर रोता छोड़ आया !