Thursday, 31 December 2015

ये उनका नया साल मनाऊँ कैसे

अपने देश को जों लूटकर चलें गए ,

उनका ही त्योहार मैं मनाऊँ कैसे !

जिस वृक्ष में कोई गुण नहीं हों ,

उसको मैं सजाऊँ कैसे !

जब उसने ना मनाई राम नवमी ,

तुलसी पूजा और नवरात्रि !

तो मैं अब उनके लिए ,

ये उनका नया साल मनाऊँ कैसे !

भारत की पहेचान

हर सुबह जहाँ मतवाली हैं ,
हर जगह जहाँ हरियाली हैं !
हर रोज़ जहाँ नए तराने ,
दुःख सुख के सब साथी हैं !

हैं नदियों का संगम यहाँ ,
गंगा जमुना सरस्वती यहाँ !
इतना देश के मिट्टी से प्यार हैं के 
यहाँ धरती भी माँ कहेलाती हैं !

सुंदरता की शान यहाँ ,
धरती के भगवान यहाँ !
धरती भी यहाँ पूजी जाती हैं ,
हर कण कण में हैं भगवान यहाँ !

हर दिल में बसता प्यार यहाँ ,
ममता की बरसात यहाँ !
मुश्किल अपनो पे आन पड़े तो ,
सब मर मिटने को तैयार यहाँ !

जहाँ संस्कारों की बात हैं ,
जहाँ भाई भाई में प्यार हैं !
जहाँ बेटी भी पूजी जाती हैं ,
यहीं मेरे भारत की पहेचान हैं !

Wednesday, 30 December 2015

सफ़र नए साल का

बढ़ चले हैं हम नए साल में नए सफ़र में नए डगर में ,
फिर आएँगी नई फ़िज़ाएँ नई कुछ राहें इस नए साल में !

जैसा भी था बड़ा सुहाना था सफ़र इस साल का ,
पर अब के साल सबका सफ़र सुहाना होगा !

हर रोज़ आसमान में चमकते हैं सूरज और तारे ,
पर इस साल कुछ ऐसा हों तुम चमकों आसमान में बनकर सितारे। !

आओ क़सम खाए बहेनो की लाज बचाए इस साल ,
बड़े बुज़ुर्गों व मात पिता की सेवा करें इस साल !

तभी ये नया साल सबका सफल होगा ,
जब अपनो के लिए अपनो के दिल में प्यार होगा !

मेरे सनम का क्या कहेना

जो भी देखे तेरे हुस्न को ,
वो हों जाए बस तेरा !
मेरे इस दिलो दिमाग़ में ,
बस तेरा ही डेरा !
जितनी पास आती हों ,
उतनी ही प्यास जगाती हों !
इस ठंड के मौसम में ,
तुम गर्मि दे जाती हों !
जितनी तुम हसीन हों ,
उतनी ही तुम उस्ताद !
पलकें झुकाकर तुमने ,
किया इस दिल पे वार !

Tuesday, 29 December 2015

अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति

अंग्रेज़ी की ऐसी हवा चली की सब अपनी भाषा भूल गए ,
औरों का नव वर्ष याद रहा ख़ुद का नव वर्ष भूल गए !

हर तरफ़ लोंग ऐसे नव वर्ष में आज खों गए ,
अपनी ही असभ्यता पर हम दीवाने हो गए !

अंग्रेज़ चले गए पर अंग्रेज़ी सभ्यता छोड़ गए ,
और हम ग़ुलामों की तरह उनकी सभ्यता अपना गए !

उनकी वेशभूषा उनकी बोली में हम यूँ खो गए ,
उन्होंने अपनाई साड़ी और हम ख़ुद नंघे हों गए !

आज हम ख़ुद की नज़रों में न जाने कितना गिर गए ,
फ़ैशन के आडंबर में हम अपने गाँव को ही भूल गए !

चलो छोड़ो फ़ैशन की दुनिया चलते हैं फिर उस गाँव की ओर ,
अपनी संस्कृति अपनी सभ्यता अपने देश की मिट्टी की ओर !

Monday, 28 December 2015

साथ फ़ेस्बुक और दोस्तों का

दिल को छुवा तो उनकी याद आइ ,
पलकें बंद करूँ तो तस्वीर नज़र आइ !
आँखे खोल के जब फ़ेस्बुक देखा तो ,
तुम दोस्तों की बड़ी याद आइ !

बीत रहा ये साल कुछ तू तू मैं मैं में ,
ये सोचकर मैंने चाय को मुँह से लगाकर !
जब एक घुट लगाई तो ,
फ़ेस्बुक के सारे दोस्तों की याद आइ !

बीच में थोड़ा मैं कहीं भटक गया था ,
मैं तुम दोस्तों से दूर चला गया था !
पर जब दोस्त मुकेश ने आवाज़ लगाई ,
सच बोलूँ तो तब मुझे फिर होश आया !

मुकेश मेहता बोलो या किरण कीर्ति बोलो ,
पवन बोलो या सोनम प्रसाद बोलो !
जब जब ख़ुद को अकेला पाया तो ,
सारे दोस्तों की टोली मेरे साथ नज़र आइ !

आ रहा फिर नया साल

तेरे इंतज़ार में बीत रहा यें साल ,
अब तो आजा आ रहा फिर नया साल !

बीतें लमहों के साथ बीत रहा ये साल ,
फिर जीवन में आजाओ आ रहा फिर नया साल !

तड़प तड़प कर गुज़रा बिन तेरे ये मेरा सारा साल ,
अब तो आजा मेरे आँगन में बुला रहा ये नया साल !

कुछ ग़लतियाँ की जो हमने इस साल ,
आओ क़सम खायें न करेंगे वो ग़लतियाँ फिर नए साल !

सारे गिले शिकवे भूलकर आजाओ साथ हैं ये नया साल ,
फिर न बिछड़ेंगे हम कभी आओ क़सम खाए इस नए साल !